लता मंगेशकर की जीवनी | Lata Mangeshkar biography, Age, Song’s, Death & More

लता मंगेशकर का जीवन परिचय, जन्म, आयु, पुरस्कार, करियर, निवल मूल्य, गीत, मृत्यु (Lata mangeshkar Biography, born, awards, career, net worth, songs, Death, Age)

लता मंगेशकर भारतीय संगीत उद्योग की शान हैं। सुंदर आवाज से धन्य, वह सबसे प्रसिद्ध भारतीय गायिका हैं। बेहद बहुमुखी प्रतिभा वाली, उन्होंने 20 से अधिक भाषाओं में गाना गाया है। लता मंगेशकर के कार्यों को सम्मान और मान्यता देने के लिए उनको भारत कोकिला के रूप में भी जाना जाता है। खैर, इस लेख में हम आपको लता मंगेशकर की जीवनी से रूबरू कराएंगे।

Table of Contents

Genral Information About Lata mangeshkar Biography

जन्म नाम:-हेमा मंगेशकर
उपनाम:-लता दीदी
नाम कमाया:-भारत की कोकिला
मिलेनियम की आवाज
मेलोडी की रानी
जन्म तारीख:-28 सितंबर 1929
जन्म स्थान:-इंदौर, इंदौर राज्य, मध्य भारत एजेंसी, ब्रिटिश भारत
उम्र:-92 वर्ष
राष्ट्रीयता:-भारतीय
स्कूल:-उसने केवल एक दिन के लिए मुंबई के एक स्कूल में पढ़ाई की थी।
शिक्षा योग्यता:-कोई डिग्री नहीं
माता:-शेवंती मंगेशकर
पिता:-दीनानाथ मंगेशकर
भाई-बहन:-1 भाई हृदयनाथ मंगेशकर 3 बहने उषा मंगेशकर, आशा भोसले और मीना खादीकर
धर्म:-हिन्दू
जाती:-गौड़ सारस्वत ब्राह्मण
पेशा:-पार्श्व गायक, संगीतकार, फिल्म प्रोड्यूसर्स
संगीत शिक्षक:-दीनानाथ मंगेशकर, उस्ताद अमानत अली खान, अमानत खान देवासवाले, गुलाम हैदर, पंडित तुलसीदास शर्मा, अनिल बिस्वास
पहला रिकॉर्ड किया गया गाना:-“नाचू या गड़े, खेलो सारी मणि हौस भारी”
आखरी रिकॉर्ड किया गया गाना:-“जीना क्या है, जाना मैंने”
मृत्यु:-6 फरवरी 2022
मृत्यु स्थान:-ब्रीच कैंडी अस्पताल, मुंबई
मृत्यु का कारण:-COVID-19 और कई अंग विफलता
श्मशान स्थान:-शिवाजी पार्क, मुंबई
Lata Mangeshkar biography

लता मंगेशकर का जन्म और शुरुआती जीवन (Lata Mangeshkar Birth & Early Life)

लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर, 1929 के दिन इंदौर के मध्य प्रांत (अब मध्य प्रदेश) में हुआ था। लता मंगेशकर दीनानाथ मंगेशकर और शेवंती मंगेशकर के पांच बच्चों में सबसे बड़ी बेटी थीं, जो एक महाराष्ट्रीयन ब्राह्मण परिवार से थीं। दीनानाथ गोवा के मंगेशी शहर से थे और उन्होंने अपने गृहनगर के नाम पर अपना उपनाम हरिदकर से बदलकर मंगेशकर कर लिया था। लता मंगेशकर के पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक कुशल शास्त्रीय गायक और मंच अभिनेता थे।

लता मंगेशकर के जन्म के समय उनका नाम हेमा मंगेशकर रखा गया था, लेकिन बाद में उनके पिता ने उनका नाम बदलकर लता मंगेशकर कर दिया, जो उनके एक नाटक में एक चरित्र से प्रेरित हुआ था। लता मंगेशकर के चार भाई-बहन थे जिनमें तीन बहनें, मीना, आशा और उषा थी और एक भाई जिसका नाम हृदयनाथ था। दीनानाथ मंगेशकर के पांचों भाई-बहनों ने अपने पिता से शास्त्रीय संगीत सीखा।

लता मंगेशकर ने मात्र पांच साल की उम्र से ही अपने पिता के संगीत नाटकों में अभिनय करना शुरू कर दिया था। लता मंगेशकर ने बाद में अमानत खान, पंडित तुलसीदास शर्मा और अमन अली खान साहब जैसे उस्तादों से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली थी। लता मंगेशकर केएल से प्रेरित थीं। सहगल का संगीत जब वह छोटी थी, तब स्कूल नहीं जाने के कारण लता मंगेशकर औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकी थी। जब लता मंगेशकर सिर्फ 13 वर्ष की थी, तब उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी लता के कंधों पर आ गई।

लता मंगेशकर का करियर (Lata Mangeshkar Career)

Lata Mangeshkar biography
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लता मंगेशकर का विभिन्न भूमिकाओं में एक शानदार करियर रहा है, कुछ भूमिकाओं में दूसरों की तुलना में बेहतर था। ईश्वर ने दी हुई आवाज ने लता मंगेशकर को साल 1940 से 1980 के दशक तक सबसे सफल और प्रसिद्ध पार्श्व गायिका बनने के लिए प्रेरित किया। वैजयंतीमाला से लेकर प्रीति जिंटा तक, लता मंगेशकर ने बॉलीवुड की सभी प्रमुख महिलाओं को अपनी आवाज दी है। लता मंगेशकर के गीतों ने वर्षों और सीमाओं के पार लाखों लोगों के दिलों को छुआ था। लता मंगेशकर ने अपने करियर की शुरुआत में कुछ अभिनय भी किया था। एक संगीत निर्देशक के रूप में उनके प्रयास उनके गायन करियर की तरह सफल नहीं रहे।

लता मंगेशकर संगीत करियर (Lata Mangeshkar’s Music Career

साल 1942 में जब लता मंगेशकर 13 साल की थीं, तब हृदय रोग के कारण उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। तब विनायक दामोदर कर्नाटकी, जो नवयुग चित्रपट फिल्म कंपनी के मालिक थे और लता के बहुत करीबी दोस्त थे, उन्होंने लता मंगेशकर के करियर में उनकी बहुत ज्यादा मदद की थी। लता मंगेशकर ने वसंत जोगलेकर की मराठी फिल्म किटी हसाल (1942) के लिए सदाशिवराव नेवरेकर द्वारा रचित गीत “नाचू या गड़े, खेलो सारी मणि हौस भारी” गाया था। लेकिन, इसे फाइनल कट में हटा दिया गया था। इसके बाद विनायक ने लता मंगेशकर को नवयुग चित्रपट की मराठी फिल्म ‘पहिली मंगला-गौर (1942)’ में एक छोटा सा रोल दिया। जिसमें लता मंगेशकर ने दादा चांडेकर द्वारा रचित ‘नताली चैत्रची नवलई’ गाया था।

मराठी फिल्म गजभाऊ (1943) के लिए लता का पहला हिंदी गाना ‘माता एक सपूत की दुनिया बदल दे तू’ था। साल 1945 में जब विनायक की कंपनी ने अपना मुख्यालय स्थानांतरित किया तो लता मंगेशकर मुंबई चली गईं। तब भिंडीबाजार घराने के उस्ताद अमन अली खान से उन्होंने संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। साल 1946 में जब लता मंगेशकर ने वसंत जोगलेकर की हिंदी भाषा की फिल्म “आप की सेवा में” के लिए ‘पा लगून कर जोरी’ गाया था। लता मंगेशकर की बहन आशा ने साल 1945 में विनायक की पहली हिंदी फिल्म, ‘बड़ी माँ’ में छोटी भूमिकाएँ निभाईं थी। उन्होंने उस फिल्म में एक भजन ‘माता तेरे चरणों में’ भी गाया था। साल 1946 में, विनायक की दूसरी हिंदी भाषा की फिल्म ‘सुभद्रा’ की रिकॉर्डिंग के दौरान लता मंगेशकर की मुलाकात वसंत देसाई से हुई थी।

साल 1948 में जब विनायक की मृत्यु हो गई थी उसके बाद, संगीत निर्देशक गुलाम हैदर ने लता को शशधर मुखर्जी से मिलने की सलाह दी थी। तो उनकी सलाह का पाला करते हुए लता मंगेशकर निर्माता शशधर मुखर्जी से मुलाकात की लेकिन, मुखर्जी ने लता की आवाज को खारिज कर दिया क्योंकि यह “बहुत पतली” थी। जिस पर हैदर ने जवाब दिया, आने वाले वर्षों में निर्माता और निर्देशक अपनी फिल्मों में गाने के लिए “लता के चरणों में गिरेंगे” और “उनसे भीख मांगेंगे”। बाद में हैदर ने लता को पहला बड़ा ब्रेक साल 1948 में फिल्म ‘मजबूर’ के गाने ‘दिल मेरा तोड़ा, मुझे कहीं का ना छोरा’ से दिया था। यह गाना तब सुपरहिट साबित हुआ था। सितंबर 2013 में अपने 84 वें जन्मदिन पर लता मंगेशकर ने खुद घोषणा की थी कि, गुलाम हैदर वास्तव में मेरे गॉडफादर हैं। वह पहले संगीत निर्देशक थे जिन्होंने मेरी प्रतिभा पर पूर्ण विश्वास दिखाया। आयेगा आने वाला साल 1949 में आई फिल्म ‘महल’ की उनकी पहली बड़ी हिट फिल्मों में से एक थी।

सात दशकों से भी अधिक के करियर में लता मंगेशकर ने अनगिनत फिल्मों में अपनी सुरीली आवाज दी है। जिसमें 36 से अधिक भारतीय भाषाओं में एक हजार से अधिक गाने रिकॉर्ड किए गए थे। ‘लग जा गले’ और ‘आजकल पांव ज़मीन पर’ जैसे भावपूर्ण गीतों के पीछे की आवाज़ भी लता मंगेशकर की है। देश के सबसे सम्मानित गायकों में से लता मंगेशकर एक हैं। भारतीय फिल्म संगीत पर उनका अभूतपूर्व प्रभाव पड़ा है। साल 1942 से लता मंगेशकर ने अपने मनमौजी कौशल से संगीत की सीमाओं को पीछे धकेल दिया है। पिछले कुछ वर्षों में, लता मंगेशकर ने मधुबाला से लेकर प्रियंका चोपड़ा तक की अभिनेत्रियों के लिए गाना गाया है। लता मंगेशकर अपने बहुमुखी आवाज की गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं, उन्होंने सभी प्रकार के एल्बम जेसे ग़ज़ल, पॉप, आदि में रिकॉर्ड बनाए हैं। लता मंगेशकर ने मदन मोहन, आरडी बर्मन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और ए-आर रहमान सहित कई दिग्गज संगीत निर्देशकों के साथ काम किया है।

लता मंगेशकर ने साल 1960 के दशक में मदन मोहन के साथ काम किया था, जिसमें “जैसे अनपढ़ से आप की नज़रों ने समझौता” “लग जा गले” और “वो कौन थी, से नैना बरसे रिम झिम”। लता मंगेशकर ने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के लिए करीब 700 से अधिक गाने गाए हैं, जिनमें नसीब से मेरे नसीब में और आशा से शीशा हो या दिल हो जेसे सुपरहिट गाने शामिल हैं। इसके अलावा गाता रहे मेरा दिल और पिया तोसे इन गाइड (1965) जैसे गाने एसडी बर्मन के लिए रिकॉर्ड किए गए थे।

लता मंगेशकर ने आरडी बर्मन के पहले और आखिरी गाने – छोटे नवाब (1961) और 1942 में कुछ ना कहो। साल 1994 में ए लव स्टोरी में गाया। एआर रहमान के साथ उनके सहयोग के परिणामस्वरूप रंग दे बसंती (2006) और ओ पालनहारे में लुका छुपी जैसे लोकप्रिय गाने हुए। फिल्म लगान (2001) में। प्यार किया से डरना क्या से मुगल-ए-आज़म (1960) से अजीब दास्तान है ये तक, दिल अपना और प्रीत पराई (1960) से लेकर प्रेम पुजारी (1970) तक रंगीला रे या यहां तक ​​कि दिल से में जिया जले तक, गायक ने वर्षों से कई कालातीत क्लासिक्स के लिए अपनी आवाज दी थी। लता मंगेशकर का अंतिम पूर्ण एल्बम दिवंगत फिल्म निर्माता यश चोपड़ा द्वारा निर्देशित 2004 की फिल्म “वीर ज़ारा” के लिए था।

लता मंगेशकर निर्माता (Lata Mangeshkar Producer)

एक निर्माता के रूप में लता मंगेशकर ने अपने जीवन मे कुल चार फिल्में बनाईं है। जिसमें वडाल, 1953 में एक मराठी भाषा की फिल्म, 1953 में सी रामचंद्र के साथ झांझर, 1955 में कंचन और 1990 में गीतकार गुलजार के निर्देशन में बनी फिल्म लेकिन। उन्होंने उसे लॉन्च किया। 2012 में खुद के म्यूजिक लेबल ने एलएम म्यूजिक कहा और छोटी बहन उषा मंगेशकर के साथ एक भक्ति एल्बम जारी किया।

लता मंगेशकर करियर संगीत निर्देशक में (Lata Mangeshkar Career in Music Director)

लता मंगेशकर गायन के अलावा कई मराठी फिल्मों के लिए संगीत निर्देशक के रूप मे भी कार्य कर चुकी है, जिनमें से पहली साल 1955 में राम राम पावणे थी। लता मंगेशकर की अन्य परियोजनाएं मराठा तितुका मेलवावा (1963), मोहित्यान्ची मंजुला (1963), साधि मनसे (1965) और तंबाडी माटी थीं (1969)। लता मंगेशकर ने फिल्म साधि मनसे के लिए महाराष्ट्र राज्य सरकार का सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार जीता था, जिसमें ‘ऐरानिच्य देवा को सर्वश्रेष्ठ गीत का पुरस्कार मिला था।

लता मंगेशकर का आखिरी गीत (Lata Mangeshkar’s last song)

लता मंगेशकर ने साल 2019 में अपना आखिरी गाना रिकॉर्ड किया था, जिसमें लता मंगेशकर ने पीएम नरेंद्र मोदी के नारे ‘सौगंध मुझे मिट्टी की’ पर आधारित एक गाने में अपनी आवाज दी थी। जो म्यूजिक वीडियो में लता को यह कहते हुए सुना गया था, ”मैं पीएम मोदी का भाषण सुन रही थी। कुछ दिन पहले, उन्होंने उसमें कुछ पंक्तियाँ कही जो मुझे लगा कि हर भारतीय की भावनाओं का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उन्होंने मुझे भी अपनी बातों से छुआ, मैंने उन्हें रिकॉर्ड किया और आज मैं इसे भारतीय सैनिकों और हर भारतीय को अपनी श्रद्धांजलि के रूप में पेश करता हूं।

लता मंगेशकर पुरस्कार और सम्मान (Lata Mangeshkar Awards & Honors)

पार्श्व गायिका के रूप में अपने शानदार करियर के लिए लता मंगेशकर जी को कई पुरस्कार और सम्मान अपने जीवन काल में मिले हैं। लता मंगेशकर द्वारा जीते गए कुछ पुरस्कारो में पद्म भूषण (1969), दादा साहब फाल्के पुरस्कार (1989), पद्म विभूषण (1999), महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार (1997), एनटीआर राष्ट्रीय पुरस्कार (1999), और एएनआर राष्ट्रीय पुरस्कार (2009) हैं। लता मंगेशकर को साल 2001 में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा लता मंगेशकर ने 3 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार साल 1972, 1974, 1990, और 12 बंगाल फिल्म पत्रकार संघ पुरस्कार जीते थे। लता मंगेशकर ने चार बार सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीता है। लता मंगेशकर को साल 1993 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

लता मंगेशकर का राजनीतिक कैरियर (Political career of Lata Mangeshkar)

वर्ष 1999 में लता मंगेशकर को राज्य सभा के सदस्य के रूप में भी नामित किया गया था। उनका कार्यकाल 2006 में समाप्त हो गया था, लेकिन सत्रों में भाग नहीं लेने के लिए उनकी आलोचना की गई थी। तब उन्होंने संसद से अनुपस्थित रहने के लिए अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया था। लता दीदी ने एक सांसद के रूप में अपनी सेवाओं के लिए दिल्ली में एक पैसा या वेतन या घर नहीं लिया था।

लता मंगेशकर बीमारी और मृत्यु (lata mangeshkar illness and death)

8 जनवरी 2022 को लता मंगेशकर ने हल्के लक्षणों के साथ COVID-19 के लिए सकारात्मक परीक्षण किया और उन्हें मुंबई में ब्रीच कैंडी अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया। लता मंगेशकर अपने स्वास्थ्य में “मामूली सुधार” के संकेतों के साथ आईसीयू में रही। लता मंगेशकर का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने 28 जनवरी 2021 को लता मंगेशकर के स्वास्थ्य में “मामूली सुधार” के बाद उन्हें वेंटिलेटर से हटा दिया गया था। लेकिन, लता मंगेशकर की सेहत फिर से बिगड़ने के बाद, वह 5 फरवरी को वेंटिलेटर पर वापस आ गई थी और “आक्रामक चिकित्सा” से गुजर रही थी।

लता मंगेशकर का 6 फरवरी 2022 को 92 वर्ष की आयु में मल्टीपल ऑर्गन डिसफंक्शन सिंड्रोम के कारण निधन हो गया। निमोनिया और COVID-19 जैसी खतरनाक बीमारी के लिए उनका 28 दिनों तक लगातार इलाज चल रहा था।

लता मंगेशकर के लिए राष्ट्रीय शोक (National mourning for Lata Mangeshkar)

भारत सरकार ने लता मंगेशकर की राष्ट्रीय शोक के लिए दो दिवसीय अवधि की घोषणा की थी और लता मंगेशकर के सम्मान में पूरे भारत में 6 से 7 फरवरी तक राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा इसकी घोषणा की थी। भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी, कई केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों, भारतीय संगीत उद्योग के कई सदस्यों, भारतीय फिल्म उद्योग, मशहूर हस्तियों, प्रशंसकों और नेटिज़न्स ने अपनी संवेदना व्यक्त की थी। भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों ने भारत बनाम वेस्ट इंडीज के पहले वनडे में लता मंगेशकर की हार का शोक मनाने के लिए काली बांह की पट्टी पहनी थी। पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान, बांग्लादेश के प्रधान मंत्री शेख हसीना, नेपाल के प्रधान मंत्री शेर बहादुर देउबा, श्रीलंका के प्रधान मंत्री महिंदा राजपक्षे, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और पाकिस्तानी मंत्री फवाद चौधरी ने लता मंगेशकर के निधन पर अपना दुख व्यक्त किया था।

लता मंगेशकर का अंतिम संस्कार (Lata Mangeshkar’s funeral)

लता मंगेशकर का अंतिम संस्कार उनके भतीजे, आदिनाथ मंगेशकर द्वारा किया गया था। लता मंगेशकर का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ, उसी दिन मुंबई के शिवाजी पार्क में किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने लता मंगेशकर की आत्मा को श्रद्धांजलि दी और पुष्पांजलि अर्पित की थी। लता मंगेशकर की बहन आशा भोसले, देवेंद्र फडणवीस, राज ठाकरे, शरद पवार, शाहरुख खान, श्रद्धा कपूर, सचिन तेंदुलकर और कई गणमान्य व्यक्ति और परिवार के सदस्य भी उपस्थित थे।

Last words About Lata Mangeshkar Biography

इस लेख में हमने भारत की पार्श्व गायक lata mangeshkar biography देखी उम्मीद है आपको lata mangeshkar biography पढ़ने में मजा आया होगा। इनका जीवन इतना सरल नहीं था इन्होंने आने वाले सभी विफलता का सामना किया और आज इन्होने अपनी अलग पहचान बनाई है। इस लेख को अपने दोस्तों, परिवार और अन्य लोगों के साथ शेयर करे और हमसे कोई भूल हुई हो तो नीचे कमेन्ट ने बताईये। धन्यवाद।

FAQ

लता मंगेशकर ने कितने गाने गाए हैं?

लता मंगेशकर ने कुल 36 भाषा मे 30,000 से भी ज्यादा गाने गए है।

लता मंगेशकर के पति का नाम क्या है?

लता मंगेशकर ने अपने जीवन मे किसी से भी शादी नहीं की है वह अविवाहित थी।

लता मंगेशकर की माता कौन थी?

शेवंति मंगेशकर

लता मंगेशकर क्यों प्रसिद्ध हैं?

लता मंगेशकर अपनी विशिष्ट आवाज और एक मुखर रेंज के लिए जो तीन से अधिक सप्तक तक फैली हुई थी उसके लिए प्रसिद्ध है।

लता मंगेशकर की कुल संपत्ति कितनी है?

लता मंगेशकर की कुल संपत्ति करीब 16 मिलियन डॉलर (120 करोड़ रुपये) है।

लता मंगेशकर की उम्र कितनी है?

92 वर्ष मृत्यु के समय

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