Maharana pratap biography in hindi – महाराणा प्रताप जीवनी हिन्दी मे

Maharana pratap biography in hindi
नमस्ते, मित्रों केसे है आप लोग आज मैं आपके लिए एक और महान व्यक्ति की जीवनी लेकर आया हूं! आपको यह जीवनी से जरूर बहुत कुछ सीखने को मिलेगा इसलिए कृपया इसे पूरा पढ़े. Maharana pratap biography in hindi

महाराणा प्रताप परिचय (Maharana pratap biography in hindi)

यह एक वीर योद्धा महाराणा प्रताप की जीवनी है इनका जन्म मेवाड़ मैं हुआ था इनके पिता महाराणा उदय सिंह और माता महाराणी जयवंता बाई इनका जन्म सिसोदिया वंश में मेवाड़ नामक जगह 9 मई 1540 को हुआ था!
महाराणा प्रताप बचपन से शूरवीर योद्धा थे! सन 1576 को जब महाराणा प्रताप मात्र 27 साल के थे तब उनको चित्तौड़ का उत्तराधिकारी बना दिया गया! वो बच्चे थे तब से वह शूरवीर और चतुर थे! एक बार जब मुगल सेनाने जब चित्तौड को चारो तरफ से घेर लिया था तब महाराणा प्रताप ने अपनी चतुराई से मुग़लों के सेना को घेर के उनको मार मार के चित्तौड से बाहर कर दिया! Maharana pratap biography in hindi 

राणा प्रताप बहुत शक्तिशाली थे उनका कद 7.5 फुट था! उनका वजन 110 किलोग्राम था! उनके पास जो भाला था केवल उसका वजन 81 किलो था और जो रक्षा कवच था उसका वजन 72 किलो था भाला,कवच,तलवार इन सबको मिला के महाराणा प्रताप टोटल 208 किलोग्राम वजन लेके युद्ध करने जाते थे! महाराणा प्रताप अपने साथ हमेशा 2 तलवार रखते थे अगर लडते वक़्त किसी की तलवार टूट जाए या गिर जाए तो अपनी एक तलवार अपने दुश्मन को दे देते थे वह कभी भी निहते पर वार नहीं करते थे!
महाराणा प्रताप उदयसिंह की संतान थे इसलिए राजगद्दी उनको मिलने वाली थी! पर जब उदयसिंह का देहांत अवस्था मैं थे तब राणा उदयसिंह ने अपनी छोटी रानी से लगाव था इसलिए राजगदी कुंवर जगमाल को मेवाड़ का उत्तराधिकारी बना दिया गया था!
प्रजा को यह बात पसंद ना आई की महाराणा प्रताप की गद्दी कुंवर जगमाल को मिल गई प्रजा इस बात से असंतुष्ट थी! कुंवर जगमाल ने मुगल से हाथ मिला लिया यह बात महाराणा प्रताप को और प्रजा को पसंद ना आई! फिर जगमाल को राजगद्दी से हाथ धोना पड़ा और महाराणा प्रताप का धूमधाम से राज्याभिषेक हुआ!

हल्दी घाटी युद्ध सन 1576

हल्दी घाटी का युद्ध मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप और मुगल के सम्राट अकबर के साथ हुआ था! 18 जून 1576 को महाराणा प्रताप के घुड़सवारो और धनुर्धारियो अकबर के साथ हुआ था!

महाराणा प्रताप ने अपनी 3000 घुड़सवारो और 400 भील धनुर्धरीयो को मैदान मे उतारा वहीं अक़बर की सेना को मानसिंह प्रथम 5,000 से 10000 सेना को नेतृत्व कर रहे थे!
यह युद्ध 3 घंटे तक चला था! इस युद्ध में महाराणा प्रताप जख्मी हो गए तो उनके साथियो ने उनको समय दिया और फिर महाराणा प्रताप को पहाड़ी के पीछे से सुरक्षित स्थान पर भेज दिया! इस युद्ध मैं महाराणा प्रताप के 1500 सैनिक की मृत्यु हो गई थी और अक़बर के 150 सैनिक की मृत्यु और 350 सैनिक गायल हो गए थे! Maharana pratap biography in hindi

महाराणा प्रताप मैं इतनी सकती थी कि युद्ध के समय उन्होंने बहलोल खान को और उसके घोड़े सहित आधा चिर दिया था! महाराणा प्रताप की 20,000 सेना और अकबर की 80,000 की सेना को हरा दिया था! मुगल के बादशाह अक़बर भी महाराणा प्रताप के डर से थर थर कांपते थे! यही नहीं जब अक़बर को सोते समय महाराणा प्रताप के सपने आते थे तो अक़बर डर से पसीना पसीना जाते थे! Maharana pratap biography in hindi

महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक

महाराणा के पास एक घोड़ा था जिसका नाम चेतक था वह घोड़ा महाराणा जेसा बुद्धिमान और शक्तिशाली था! चेतक अपने पराक्रम और स्वामी प्रेम के लिए पूरे जगत मैं प्रसिद्ध है! महाराणा प्रताप को चेतक अपनी जान से भी ज्यादा प्यारा था! वह घोड़ा महाराणा के साथ 318 किलोग्राम वजन उठा के युद्ध मैं जाता था फिर भी उस घोड़े की रफ्तार जेसे मानो हवा से बाते करता हो!
महाराणा प्रताप ने अरबी व्यापारी से 3 घोड़े लिए थे जिनके नाम चेतक, त्राटक और अटक उसमें से अटक नाम का घोड़ा मरचुका था! चेतक और त्राटक मैं चेतक समझदार था इसलिए त्राटक को अपने भाई शक्तिसिंह को दे दिया! Maharana pratap biography in hindi

चेतक ने 2 सगे भाइयों को मिला या था कुछ मतभेद के कारण शक्तिसिंह को देशद्रोह के आरोप में राज्य से बाहर निकाल दिया था! फिर शक्तिसिंह ने मुग़लों के साथ हाथ मिला लिया और मुग़लों की टुकड़ी के साथ लडते थे!
जब महाराणा प्रताप हल्दीघाटी के युद्ध मैं गायल हो गए थे तो चेतक उनको सुरक्षित स्थान पर ले जा रहा था तब मुगल के दो घुड़सवार उनका पीछा कर रहे थे! जब चेतक ने एक बड़ा नाला पार किया और चेतक गिर गया तभी महाराणा को अपनी मातृभूमि पर पीछे से आवाज आई “नीला घोड़ा रा असवार” यह आवाज शुन के महाराणा प्रताप ने पीछे मूड के देखा तो उनके भाई शक्तिसिंह मुग़लों के दो घुड़सवार को मार दिया! इस तरह शक्तिसिंह और महाराणा प्रताप पहली बार अपने भाई से गले मिले. Maharana pratap biography in hindi

जब चेतक गायल था तब अपने स्वामिभक्त और अपनी शूरवीरता से महाराणा प्रताप को हल्दीघाटी के मैदान से महाराणा प्रताप को एक बड़े नाले को पार कर के वीरगति प्राप्त कर ली और चेतक का नाम इतिहास के पन्नों में अपनी स्वामिभक्ती और शूरवीरता के लिए जाना जाता है! Maharana pratap biography in hindi

घास की रोटियां

जब महाराणा प्रताप ने अपनी और अपनी परिवार की जान बचाने के लिए जंगल में इधर उधर भटक रहे थे भूखे प्यासे दिन मैं 4 से 5 बार भोजन पकाया और हर बार राणा प्रताप को भोजन छोड़ के भागना पड़ा क्योंकि मुगल की सेना उनका पीछा कर रहीं थीं! एक बार एसे ही जब महाराणा प्रताप भाग रहे थे तब उनकी पत्नी और पुत्रवधु घास के बीजों को पीसकर कुछ रोटियां बनाई उसमें से कुछ रोटी बच्चों को दे दी गई और आधी रोटी अगले दिन के लिए बचा के रखी उसी समय प्रताप को अपनी बेटी की रोने की आवाज आई एक जंगली बिल्ली महाराणा प्रताप की बेटी के हाथ से वह घास की रोटी लेकर भाग गई और भूख के मारे प्रताप की बेटी के आंख से आशु टपक गए! यह करुण दृश्य देख के महाराणा प्रताप का दिल बैठ गया! यह देख के महाराणा ने ऐसे राज्याधिकार को धिक्कारा जिसकी वज़ह से उनको ऐसे करुण दृश्य देखने पडे! Maharana pratap biography in hindi

महाराणा प्रताप की बीविया ओर बच्चे

महाराणा प्रताप की टोटल 14 बीविया थी जिनसे महाराणा को 17 बेटे और 5 बेटियाँ प्राप्त हुई थी! Maharana pratap biography in hindi

Milkha singh biography in hindi

अकबर भी महाराणा प्रताप की प्रशंसा किए बिना नहीं रह सका

जब महाराणा प्रताप अपना जीवन जंगल में व्यतित कर रहे थे तब अकबर ने उनके पीछे जासूस लगा दिया था! जासूस जब वापस आया तो अकबर को बताया कि महाराणा प्रताप और उनका परिवार और उनके साथी जंगली फल और जंगली पेड़ों के पत्ते साथ मैं बैठ कर खा रहे थे!

जासूस ने बताया उनमे से कोई भी व्यक्ति दुखी न था नाही कोई उदास था! यह बात सुन कर अकबर का हृदय ठहर गया और महाराणा प्रताप के लिए सन्मान बड गया! अकबर के विश्वासी सरदार खानबाबा ने भी अक़बर के मुख से महाराणा प्रताप की प्रशंसा सुनी है! अक़बर ने अपनी भाषा मैं लिखा ” दुनिया मे सभी नाशवान है, महाराणा प्रताप ने धन संपत्ति और भूमि को छोड़ दिया पर कभी भी किसी के सामने अपना मस्तक नहीं झुकाया. हिन्दुस्तान के राजा मैं वहीं एक सच्चा योद्धा और राजा है जिसने अपने जाती के गौरव को बनाये रखा” Maharana pratap biography in hindi

महाराणा प्रताप की मृत्यु

हल्दीघाटी के युद्ध के बाद जब महाराणा प्रताप जंगल में जब धनुष की डोर खींचने से उनके आंच मैं लगने के कारण इलाज के वक़्त महाराणा प्रताप की 57 वर्ष की उम्र मैं उनका 29 जनवरी 1597 को प्रताप का निधन हो गया.

जब महाराणा प्रताप के निधन का संदेशा मुगल के सम्राट अकबर को मिला तब उनके आँखों से महाराणा प्रताप की अटल देशभक्ति और माताप्रेम देख के उनके आखों से आशु छलक आए थे! तब बादशाह अकबर बोले कि महाराणा ने पुरी जिंदगी कभी भी उनके सामने अपना सिर नहीं झुकाया महेल धन दोलत सब त्याग दिया पर कभी भी उन्होंने उनसे सन्धि नहीं की! Maharana pratap biography in hindi

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