विक्रम बत्रा की जीवनी | Vikram Batra biography, Kargil War, Death

कैप्टन विक्रम बत्रा की जीवनी, हिंदी में बायोपिक मूवी, पत्नी, मृत्यु, प्रेमिका, मंगेतर, भाई, डिंपल चीमा, कारगिल स्टोरी (Captain Vikram Batra Biography, Biopic Movie in Hindi, Wife, Death, Girlfriend, Fiance, Brother, Dimple Cheema, Kargil Story)

दोस्तो हम अक्सर फिल्म अभिनेता और बिजनेसमैन के नाम याद रखते है लेकिन क्या आप हमारे भारत देश के असली हीरो को जानते है। आज मे आपको उन्हीं हीरो में से एक जिन्होंने साल 1999 में हुए कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी और अपने देश के लिए खुद को समर्पण कर दिया था। क्या आपको उनका नाम पता है? जी,हाँ आप सही समझे कैप्टन विक्रम बत्रा जो भारतीय सेना के एक सैनिक थे। जिन्हें भारत माता के लिए शहीद होने के बाद परमवीर चक्र (पीवीसी) से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उनको साल 1999 के कारगिल युद्ध में उनके अनुकरणीय कार्यों के लिए, उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

इनके जीवन पर एक बायोपिक फिल्म भी बनी है। इस फिल्म का नाम शेरशाह है जो 2021 को रिलीज हुई थी। इस फिल्म में विक्रम बत्रा का किरदार सिद्धार्थ मल्होत्रा ने निभाया था।

Table of Contents

Genrate Information (Vikram Batra Biography)

पूरा नाम:-विक्रम गिरधरलाल बत्रा
उपनाम:-शेरशाह
जन्म तारीख:-9 सितंबर 1974
जन्म स्थान:-पालमपुर, हिमाचल प्रदेश, भारत
माता:-कमल कांता बत्रा
पिता:-गिरिधर लाल बत्रा
अन्य भाई-बहन:-भाई:- विशाल बत्रा
बहने:- सीमा और नूतन
राष्ट्रीयता:-भारतीय
धर्म:-हिंदू
जाति:-पंजाबी खत्री
स्कूल:-• डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश (8वीं कक्षा तक)
• सेंट्रल स्कूल, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश (सीनियर सेकेंडरी)
कॉलेज:-• डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़
• पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
शिक्षा योग्यता:-• बी.एससी चिकित्सक विज्ञान
• एमए अंग्रेजी (पूरा नहीं हुआ)
वैवाहिक स्थिति:-अविवाहित
गर्लफ्रेंड:-डिंपल चीमा
मंगेतर:-डिंपल चीमा
पेशा:-आर्मी ऑफिसर
आर्मी रैंक:-कैप्टन
सेना में सेवा के वर्ष:-1996 – 1999
मृत्यु तारीख:-7 जुलाई 1999
मृत्यु स्थान:-एरिया लेज, पॉइंट 4875 कॉम्प्लेक्स, कारगिल, जम्मू और कश्मीर, भारत
मृत्यु का कारण:-शहादत (1999 के कारगिल युद्ध के दौरान)
उम्र:-24 साल (मृत्यु के समय उम्र)
Captain Vikram Batra Biography

विक्रम बत्रा शुरुआती जीवन और परिवार (Vikram Batra Early Life And Family)

आज के इस स्वार्थी युग मे बहुत कम लोग होते हैं जो देश के लिए अपनी जान देने को तैयार होते है। उनमें से एक है विक्रम बत्रा जिनका जन्म 9 सितंबर 1974 को हिमाचल प्रदेश के पालमपुर गांव में हुआ था। कैप्टन विक्रम बत्रा एक हिंदू परिवार से ताल्लुक रखते हैं।

विक्रम बत्रा के पिता का नाम गिरिधर लाल बत्रा हैं जो सरकारी स्कूल के प्रिन्सिपल है। विक्रम बत्रा की माता का नाम कमल कांता बत्रा हैं। जो एक सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक हैं। विक्रम बत्रा का एक जुड़वां भाई भी है जिसका नाम विशाल बत्रा है। जो चंडीगढ़ में एक बैंक में काम करता है। इसके अलावा विक्रम बत्रा की दो बड़ी बहनें सीमा और नूतन हैं।

विक्रम बत्रा शिक्षा योग्यता (Vikram Batra Education Qualifications)

विक्रम बत्रा ने अपनी प्राथमिक पढ़ाई डीएवी पब्लिक स्कूल से पूरी की थी। उसके बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए विक्रम बत्रा ने केंद्रीय विद्यालय में अपना दाखिला करवा लिया। उसके बाद अखिल भारतीय केवीएस प्रथम मे विक्रम ने अपने भाई के साथ नेशनल टेबल टेनिस स्कूल का प्रतिनिधित्व किया और उसमे जीत भी हासिल की थी। विक्रम बत्रा अपने कॉलेज के दिनों में बहुत सक्रिय हुआ करते थे। जिसके कारण वह एनसीसी एयर विंग में शामिल हो गये और वंहा विक्रम बत्रा ने पिंजौर एयरफील्ड और फ्लाइंग क्लब में 40 दिनों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। जब विक्रम बत्रा को प्रशिक्षण के लिए चुना गया, तब विक्रम बत्रा ने सी प्रमाणपत्र के लिए योग्यता प्राप्त की और उन्हें एनसीसी में एक कप्तान के रूप में नियुक्त कर लिया गया।

विक्रम बत्रा सेना में शामिल हुए और प्रतिक्षण(Vikram Batra Join Army And Training)

विक्रम बत्रा के दिल में देश के प्रति देशभक्ति तब पैदा हुई जब उन्होंने साल 1994 में एनसीसी कैडेट के रूप में गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया था। तभी विक्रम बत्रा ने अपने माता-पिता को भारतीय सेना में शामिल होने की अपनी इच्छा के बारे में बताया। जिसके चलते साल 1995 में कॉलेज के दिनों में ही हॉन्गकॉन्ग मुख्यालय वाली शिपिंग कंपनी द्वारा उन्हें मर्चेंट नेवी के रूप में चुना गया था।

अपने कॉलेज की पढ़ाई करने के दौरान विक्रम बत्रा ने एमए करने के लिए चंडीगढ़ में स्थित पंजाब विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया और संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। पढ़ाई के साथ विक्रम बत्रा एक ट्रैवल एजेंसी में पार्ट टाइम जॉब के रूप में शामिल हो गए। वहाँ विक्रम बत्रा ने एक शाखा प्रबंधक के रूप में काम किया। विक्रम बत्रा ने साल 1996 में सीडीएस की परीक्षा दी थी। जिसके बाद विक्रम बत्रा का चयन इलाहाबाद के एक सेवा चयन बोर्ड में हो गया। वहां करीब 35 उम्मीदवारो को चुना गया था। जिनमें से 1 का नाम विक्रम बत्रा था। अब विक्रम बत्रा को भारत के प्रति देशभक्ति इतनी बढ़ गई थी कि उन्होंने कॉलेज छोड़कर भारतीय आर्मी अकादमी में शामिल होना सही समझा।

भारतीय आर्मी अकादमी में शामिल होने के बाद कैप्टन विक्रम बत्रा ने साल 1996 में मानेकशॉ बटालियन आईएमए ज्वाइन कर लिया। इसके बाद 6 दिसंबर 1997 को विक्रम बत्रा ने अपनी 19 महीने की ट्रेनिंग पूरी की जिसके बाद उन्होंने आईएमए से स्नातक की डिग्री हासिल की। विक्रम बत्रा का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, उनको जम्मू और कश्मीर राइफल्स द्वारा एक लेफ्टिनेंट के रूप में 13 वीं बटालियन के साथ कमीशन किया गया था। एक माह का प्रशिक्षण करने के दौरान उन्हें पुन: मध्य प्रदेश के जबलपुर भेजा गया था।

विक्रम बत्रा का प्रशिक्षण खत्म होने के बाद, उन्हें जम्मू और कश्मीर के बारामूला जिले के सोपोर गाँव में भेज दिया गया। एक ऐसा क्षेत्र जहाँ आतंकवादी गतिविधियाँ बड़े पैमाने पर होती थीं। उसके बाद विक्रम बत्रा का प्रशिक्षण यहीं नहीं रुका। इसके बाद विक्रम बत्रा यंग ऑफिसर कोर्स पूरा करने के लिए 5 महीने की अवधि के लिए इन्फैंट्री स्कूल महू चले गए और प्रतिक्षण लेने लगे। जब विक्रम बत्रा का यह कोर्स पूरा हुआ, तो उन्हें अल्फा ग्रेडिंग पुरूस्कार से सम्मानित किया गया और उन्हें भारत देश की सेवा करने के लिए वापस जम्मू बटालियन में भेज दिया गया।

विक्रम बत्रा गर्लफ्रैंड, मंगेतर डिंपल चीमा (Vikram Batra Girlfriend, Fiance, Dimple Cheema)

विक्रम बत्रा अपनी मंगेतर डिंपल चीमा से पहली बार अपने पसंदीदा कैफे में मिले। जब वह कारगिल युद्ध से पहले होली की छुट्टियों के दौरान अपने घर आए थे। उस समय डिंपल चीमा को विक्रम बत्रा की बहुत चिंता होती थी। इसलिए डिंपल चीमा ने विक्रम को कारगिल युद्ध के दौरान अपना ध्यान रखने के लिए कहा था। तब विक्रम बत्रा बोले “या तो मैं अपनी जीत का तिरंगा लहराता हुआ घर वापिस आऊंगा, या फिर उसी तिरंगे में लिपटा हुआ घर आऊंगा, लेकिन मैं घर जरूर वापस आऊंगा”

कारगिल युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा का योगदान (Contribution of Captain Vikram Batra in Kargil War)

विक्रम बत्रा की शूर वीरता कुछ ऐसी थी, जिसने साल 1999 के कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। अपनी होली की छुट्टी पूरी करने के बाद, वो तुरंत बटालियन में शामिल होने के लिए सोपोर वापस आ गए थे। विक्रम बत्रा की बटालियन को तब उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की ओर बढ़ने के लिए कहा गया था। विक्रम बत्रा ने अपनी बटालियन 8 माउंटेन डिवीजन की 192 माउंटेन ब्रिगेड के तहत आतंकियों को खत्म करने के लिए जम्मू में अपना कार्यकाल पूरा किया था। इसलिए विक्रम बत्रा और उनकी बटालियन वंहा जाने का आदेश दिया गया था।

Vikram Batra Biography
Vikram Batra Biography

पाकिस्तान की सेना ने स्वचालित हथियारों को मजबूत करने वाली भारतीय सेना के खिलाफ सेक्टर एरिया में मजबूत किलेबंदी की थी। करगिल युद्ध के दौरान 20 जून 1999 को कमांडर डेल्टा कंपनी के कैप्टन विक्रम बत्रा को ऑपरेशन विजय के दौरान पॉइंट 5140 पर हमला करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कैप्टन विक्रम बत्रा ने पूर्व से अपनी पूरी बटालियन के साथ दुश्मन को पता लगे बिना ही उन पर हमला कर दिया और उनके क्षेत्र में प्रवेश कर गए। अपने दस्ते को पुनर्गठित करते हुए, विक्रम बत्रा दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने के लिए आगे बढ़े।

उस समय कैप्टन विक्रम बत्रा अपने बटालियन का नेतृत्व कर रहे थे और सबसे आगे रहकर बड़ी निडरता के साथ दुश्मन के इलाके पर हमला कर रहे थे। हमले के दौरान विक्रम बत्रा ने 4 दुश्मन सैनिकों को मार डाला। जिस क्षेत्र में दुश्मन बहुत दुर्गम था, उसके बावजूद विक्रम बत्रा ने दुश्मनों का खात्मा कर दिया और उनके रेडियो स्टेशन पर जाकर अपनी जीत की घोषणा की।

कैप्टन विक्रम बत्रा की शूर वीरता का अनुसरण करते हुए इस ऑपरेशन को भी विक्रम बत्रा और उनकी टुकड़ी को सौंपा गया था। इस अभियान को खराब करने वाली सड़क भी बहुत कठिन था, क्योंकि इसमें दोनों तरफ खड़ी ढलान थी और दुश्मनों द्वारा पूरी तरह से अवरुद्ध एकमात्र सड़क थी। इसके बावजूद कैप्टन विक्रम बत्रा ने संकरे रास्ते से गुजरते हुए अपने पूरे जोश और बटालियन के साथ दुश्मन के ठिकाने पर पहुंचकर हमला करने का फैसला किया। उस हमले के दौरान पॉइंट ब्लैक रेंज पर विक्रम बत्रा और उनकी टीम द्वारा पांच दुश्मनों को मार गिराया गया था।

कैप्टन विक्रम बत्रा का बलिदान और मृत्यु (Sacrifice and death of Captain Vikram Batra)

1999 के कारगिल युद्ध के दौरान विक्रम बत्रा को बहुत गहरे घाव हुए थे। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और रेंगते हुए दुश्मन पर बड़े-बड़े ग्रेनेड बॉम्ब फेंके। विक्रम बत्रा द्वारा फेंके गए ग्रेनेड से दुश्मनों का पूरा इलाका तबाह हो गया और तमाम दुश्मन एक साथ मारे गए। अपने गहरे घावों के बाद भी विक्रम बत्रा ने हार नहीं मानी और अपनी सेना को आगे बढ़ने और दुश्मनों पर हमला करने के लिए प्रेरित करते रहे। लेकिन अपने शरीर पर हुए गहरे घावों और भारी गोलीबारी के कारण विक्रम बत्रा ने युद्ध के मैदान में उसी स्थान पर अपनी जान दे दी। इस तरह विक्रम बत्रा को शहादत तो मिली लेकिन आखिरी सांस तक देश के लिए लड़ते रहे।

कैप्टन विक्रम बत्रा फिल्म (Captain Vikram Batra movie)

वर्ष 2013 में आपने “एलओसी कारगिल” फिल्म देखी होगी, जो पूरी तरह से कारगिल योद्ध के संघर्ष पर आधारित थी। यह फिल्म बॉलीवुड द्वारा रिलीज़ की गई थी जिसमें बॉलीवुड स्टार अभिषेक बच्चन ने विक्रम बत्रा की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

साल 2021 में शेरशाह कैप्टन विकम बत्रा पर आधारित एक और फिल्म आई है जिसमें सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​​​विक्रम बत्रा की भूमिका में हैं और कियारा आडवाणी डिंपल चीमा की भूमिका में दिखाई दी है।

विक्रम बत्रा पीवीसी पुरूस्कार (Vikram Batra PVC Award)

विक्रम बत्रा को मरणोपरांत भारत सरकार द्वारा शूर वीरता के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। इसके साथ विक्रम बत्रा ने भारत देश के लिए युद्ध में अपना कौशल दिखाकर वीरगति प्राप्त की थी।

FAQ

Q. विक्रम बत्रा फिल्म?

Ans. एलओसी कारगिल (2013) और शेरशाह (2021)

Q. विक्रम बत्रा गर्लफ्रेंड?

Ans. डिंपल चीमा

Q.कैप्टन विक्रम बत्रा कौन थे ?

Ans. कैप्टन विक्रम बत्रा भारतीय सेना के जवान थे, जिसने देश के लिए अपनी जान दे दी। जिस वीरता से विक्रम बत्रा ने भारत देश के लिए युद्ध में अपना कौशल दिखाकर वीरगति प्राप्त की थी, उसके लिए उन्हें मरणोपरांत भारत सरकार द्वारा परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

Q. कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म कब हुआ था?

Ans. 9 सितंबर 1974

Q. कैप्टन विक्रम बत्रा के माता-पिता कोन है?

Ans. गिरिधर लाल बत्रा और कमल कांता बत्रा

Q. विक्रम बत्रा की मृत्यु कब हुई थी?

Ans. विक्रम बत्रा की मृत्यु 7 जुलाई 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान हुई थी।

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