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लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी | Sardar Vallabhbhai Patel Biography, Jayanti Date 2022, Death

Sardar Vallabhbhai Patel Biography आज भारत अखंड है, इसका श्रेय जाता है तो वो है भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जो राजनीति में आज भी एक प्रतिष्ठित नाम है। पेशे से सरदार वल्लभ भाई पटेल एक वकील और राजनीतिक कार्यकारी थे। भारत देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद समग्र भारत का एकीकरण करने के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भारतीय संघ में 500 से भी अधिक रियासतो का एकीकरण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सरदार वल्लभ भाई पटेल महात्मा गांधी की विचारधारा और सिद्धांत से बहुत प्रभावित थे। लोगों की पसंद होने के बावजूद भी सरदार वल्लभ भाई पटेल गांधीजी के कहने पर कौंग्रेस की अध्यक्षता से हट गए थे। वह स्वतंत्रता भारत के पहले गृहमंत्री थे और देश के एकीकरण के लिए उनके प्रयासों के लिए लोगों ने उनको लौह पुरुष का नाम दिया। इसी लौह पुरुष के जन्मदिन पर यानी 31 अक्टूबर को हम हर साल ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ मनाते है।

Table of Contents

सरदार वल्लभभाई पटेल जीवनी (Sardar Vallabhbhai Patel Biography)

पूरा नाम:-वल्लभभाई झावेरभाई पटेल
उपनाम:-लौह पुरुष (Iron Man Of India)
जन्म तारीख:-31 अक्टूबर 1875
जन्म स्थान:-नडियाद, बॉम्बे प्रेसीडेंसी (वर्तमान गुजरात में स्थित)
पिता:-झावेरभाई पटेल
माता:-लाडबाई
पत्नी:-झावेरबा
बच्चे:-मणिबेन पटेल, दयाभाई पटेल
शिक्षा:-एनके हाई स्कूल, पेटलाड; इंस ऑफ़ कोर्ट, लंदन, इंग्लैंड
राष्ट्रीयता:-भारतीय
धर्म:-हिंदू
जाति:-लेवा पाटीदार
राजनैतिक विचारधारा:-मध्यम दक्षिणपंथी
प्रकाशन:-1. एक राष्ट्र के विचार 2.वल्लभभाई पटेल 3. वल्लभभाई पटेल की कलेक्टेड वर्क्स 4. 15 खंड
निधन:-15 दिसम्बर 1950
मृत्यु स्थान:-बॉम्बे भारत (मुंबई, भारत)
स्मारक:-सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय स्मारक, गुजरात (Statu Of Unity)
सरदार वल्लभभाई पटेल जीवनी (Sardar Vallabhbhai Patel Biography)

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म और परिवार (Sardar Vallabhbhai Patel Birth And Family)

हमारे प्यारे और भारत के लौह पुरुष कहे जाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 में गुजरात में स्थित गाँव नडियात में हुआ था। सरदार वल्लभभाई पटेल एक हिंदू लेवा पाटीदार समाज से ताल्लुक रखते हैं। वल्लभभाई पटेल के पिता झावेरभाई पटेल ने झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की सैना में सेवा की थी, लेकिन वल्लभभाई पटेल की माता लाडबाई एक आध्यात्मिक महिला थी।

सरदार वल्लभभाई पटेल शिक्षा (Sardar Vallabhbhai Patel Education)

सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा गुजराती माध्यमिक स्कूल से कीया है, लेकिन बाद में वल्लभभाई पटेल ने खुद को अंग्रेजी माध्यमिक स्कूल में स्थान्तरित कर लिया। वर्ष 1897 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी हाई स्कूल की पढ़ाई को पूर्ण कर लिया और उन्होंने आगे कानून (Law) की पढ़ाई करने का मन बना लिया जिसके लिए वह कानून की तैयारी करने मे लगे गए और साल 1910 को वह इंग्लेंड में डिग्री प्राप्त करने चले गए। फाइनली उन्होंने 1913 को इंस ऑफ़ कोर्ट, लंदन हाई स्कूल से अपनी कानून की डिग्री प्राप्त कर ली।

सरदार वल्लभभाई पटेल ने इंग्लैंड में अपनी डिग्री प्राप्त करने के बाद कानूनी क्षमता को बढ़ाने के लिए भारत वापिस लौट आए और गुजरात के गोधरा में अपने कानूनी अभ्यास को शुरू रखा। वल्लभभाई पटेल को ब्रिटिश सरकार द्वारा बहुत सारी ऑफर की पेशकश की थी लेकिन वल्लभभाई पटेल ने उन सारे ऑफर को साफ साफ ठुकरा दिया क्युकी वह ब्रिटिश सरकार और उनकी कानून व्यवस्था के खिलाफ थे और उनके कट्टर विरोधी भी थे इसलिए सरदार वल्लभभाई पटेल ने ब्रिटिश सरकार के लिए कार्य ना करने का फैसला किया था।

सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपना अभ्यास गोधरा से अहमदाबाद में स्थान्तरित कर लिया जंहा पर वह गुजरात क्लब के सदस्य बन गए और महात्मा गांधी के एक व्याख्यान में भाग लिया। महात्मा गांधी के उस व्याख्यान ने सरदार वल्लभभाई पटेल को मंत्रमुग्ध कर दिया और तुरंत करिश्माई नेता का कट्टर फोल्लोवर बनने के लिए गाँधीजी के सिद्धांतों को अपनाया।

सरदार वल्लभभाई पटेल पत्नी और बच्चे (Sardar Vallabhbhai Patel Wife And Children)

सरदार वल्लभभाई पटेल का विवाह मात्र 16 साल की उम्र में हो गया था। सरदार वल्लभभाई पटेल ने वर्ष 1891 में झवेरबा पटेल से शादी की थी। सरदार वल्लभभाई पटेल और झवेरबा पटेल कि दो संताने थी एक बेटी मणिबेन पटेल 1904 में पैदा हुई और दूसरा बेटा दयाभाई पटेल जो 1906 में पैदा हुई थीं। सरदार पटेल के पोते का नाम गौतम पटेल और बिपिन पटेल हैं।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका (Sardar Vallabhbhai Patel Role In Indian Freedom Struggle Essay)

भारत देश को आजाद करने के लिए सभी स्वतंत्रता सैनानी एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनमें एक नाम शीर्ष पर आता है और वो है सरदार वल्लभभाई पटेल का जिन्होंने भारत को स्वतंत्रता दिलाने में कई अहम कदम उठाए थे और बहुत संघर्ष किया था।

महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल को साल 1930 में तीन महीने के लिए कारावास (जेल) की सजा सुनाई गई थी और मार्च 1931 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कराची अधिवेशन का पहली बार नेतृत्व किया।

सरदार वल्लभभाई पटेल ने महात्मा गांधी की एक व्यक्तिगत आज्ञा के भंग करने के कारण साल 1940 में फिर से गिरफ्तार किये गये थे, और उन्हें नौ महीने की जेल का सामना करना पड़ा था। 9 महीने की इस जेल की अवधि के दौरान वल्लभभाई पटेल ने 20 पाउंड से भी अधिक अपना वजन कम किया था। इसके अलावा सरदार वल्लभभाई पटेल को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 1942 से 1945 तक अहमदनगर के किले में गिरफ्तार और कैद किया गया था।

सरदार वल्लभभाई ने 1937 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व किया था। लोग भी सरदार वल्लभभाई पटेल को पद पर लाना चाहते थे और कांग्रेस राष्ट्रपति 1937 के पद के लिए वह एक प्रमुख दावेदार थे, लेकिन महात्मा गांधी के दबाव के कारण सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपना नामांकन वापस ले लिया और जवाहरलाल नेहरू भारत का राष्ट्रपति बना दिया।

सरदार वल्लभभाई पटेल एक बार फिर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए प्रमुख उम्मीदवार थे लेकिन गांधी ने एक बार फिरसे हस्तक्षेप किया और जवाहरलाल नेहरू को कांग्रेस के अध्यक्ष का अध्यक्ष चुन लिया।

इसके बाद जवाहरलाल नेहरू को ब्रिटिश सरकार ने अंतरिम सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। अगर सरदार वल्लभभाई पटेल कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में चुने जाते, तो शायद सरदार वल्लभभाई पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री होते और आज देश का नक्शा कुछ और ही होता।

स्वतंत्र भारत में सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका (Sardar Vallabhbhai Patel Role In Politics)

जब 1947 में भारत देश को स्वतंत्रता मिली तब वह भारत के पहले उप प्रधानमंत्री के रूप में चुने गए थे।जो गृह, राज्यों और सूचना और प्रसारण जैसे विभागों के लिए जिम्मेदार थे और वे भारत के पहले प्रधानमंत्री बनने के लिए लोगों की पहली पसंद भी थे, लेकिन महात्मा गांधी की वजह से यह नहीं हो सका और पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। सरदार वल्लभभाई पटेल ने कई मुद्दों पर जवाहरलाल नेहरू से असहमति जताई।

जब भारत देश आजाद हुआ था तो देश मे कुछ 562 जितनी रियासत थी। जिसके शासक को ब्रिटिश सरकार ने 2 विकल्प दिए थे, जिसमें पहला था कि या रियासत भारत या पाकिस्तान के साथ जुड़ जाए या फिर स्वतंत्र रहे। कांग्रेस ने यह एकीकरण का मुश्किल कार्य सरदार वल्लभभाई पटेल को सौप दिया।

सरदार वल्लभभाई पटेल ने 6 अगस्त 1947 को भारत के एकीकरण की प्रक्रिया शुरू की और जम्मू कश्मीर, जूनागढ और हैदराबाद को छोडकर उन सभी रियासत को एकीकृत किया और भारत का हिस्सा बनाया। सरदार वल्लभभाई पटेल ने अंत मे अपने राजनीतिक कौशल से इस स्थिति को निपटा और भारत का हिसा परिग्रहण कर लीया। आज हम भारत देश का जो नक्शा देख रहे है वह सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा किए गए सफल प्रयासों का परिणाम है।

सरदार वल्लभभाई पटेल भारत की संविधान सभा के एक प्रमुख कार्यकर्ता थे। भारत का संविधान बनाने वाले डॉ.बी.आर.आंबेडकर की नियुक्ति की सिफारिश भी सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी। वल्लभभाई पटेल ने प्रशासन और पुलिस सेवा के लिए भी अहम भूमिका निभाई थी।

सरदार वल्लभभाई पटेल ने ही 1947 में जब पाकिस्तान आजाद हुआ था तो उन्होंने कश्मीर पर हमला कर दिया था इस मुश्किल गड़ी को भी वल्लभभाई पटेल ने ही नेतृत्व किया था और सेना के तत्कालीन विस्तार की स्वयं निगरानी की थी और आने वालीं समस्या के पहलू को सुधारा था। इसलिए वह 1947 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय सेना के सर्वोच्च कमांडर-इन-चीफ थे।

सरदार वल्लभभाई पटेल की मृत्यु (Sardar Vallabhbhai Patel Death)

साल 1950 में जब गर्मियों का सीजन चल रहा था तब सरदार वल्लभभाई पटेल के स्वास्थ्य में गिरावट आने लगी तभी उनकी बेटी ने ही उनका ख्याल रखना शुरु कर दिया लेकिन 2 नवंबर के बाद से ही उनकी तबीयत काफी बिगड गई। जैसे ही सरदार वल्लभभाई पटेल अपना होश खोने लगे और अपना जीवन बिस्तर पर व्यतित कर रहे थे तब वह 12 दिसंबर 1950 को डॉक्टर रॉय के कहने पर अपने इलाज के लिए मुंबई गए और 15 दिसंबर 1950 को मुंबई के बिड़ला हाउस में दिल का दौरा पढ़ने की वजह से निधन हो गया।

बॉम्बे (मुंबई) के सोनापुर में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू, राजगोपालाचारी और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद सहित लगभग दस लाख लोगों ने भाग लिया था।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Sardar Vallabhbhai Patel Statue of Unity)

सरदार पटेल की याद में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण किया गया था। सरदार वल्लभभाई पटेल की यह मूर्ति 182 मीटर ऊंचाई के साथ दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है। जिसे सरदार वल्लभभाई पटेल के गुजरात राज्य के नर्मदा जिले के गरुड़ेश्वर में सरोवर नामक बाँध पर बनाया गया था और देश के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 31 अक्टूबर 2018 का उद्घाटन किया था। इस विशालकाय मूर्ति का डिजाइन प्रसिद्ध मूर्तिकार राम वी सुतार द्वारा किया गया था।

Statue of Unity

FAQ’S About Sardar Vallabhbhai Patel Biography

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म कब हुआ था?

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था।

सरदार वल्लभभाई पटेल को भारत रत्न पुरस्कार कब मिला था?

सरदार वल्लभभाई पटेल को भारत रत्न पुरस्कार से साल 1991 में भारत सरकार ने मरणोपरांत सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से वल्लभभाई पटेल को भारत रत्न से सम्मानित किया था।

दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति कौनसी है?

दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति सरदार वल्लभभाई पटेल की है जिसको स्टैच्यू ऑफ यूनिटी कहा जाता है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की स्थापना कब हुई थी।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की स्थापना 31 अक्टूबर 2018 को माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा हुई थी।

सरदार वल्लभभाई पटेल किस जाती के थे?

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म गुजरात के लेवा पटेल (पाटीदार) जाती में हुआ था।

सरदार वल्लभभाई पटेल की मृत्यु कब और कैसे हुई?

सरदार वल्लभभाई पटेल की मृत्यु 15 दिसंबर 1950 को दिल का दोहरा पढ़ने की वजह से हुई थी।

सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती कब मनाई जाती है?

सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती हर साल 31 अक्टूबर को मनाई जाती है।

सरदार वल्लभभाई पटेल की पत्नी का क्या नाम था?

सरदार वल्लभभाई पटेल की पत्नी का नाम झावेरबा था।

उम्मीद कर्ता हूं दोस्तों हमारे द्वारा लिखा गया यह लेख Sardar Vallabhbhai Patel Biography हिंदी मे पढ़कर आनंद आया होगा। Sardar Vallabhbhai Patel Biography जेसे ही और लेख या जीवनी पड़ने के लिए हमे YouTube पर Subscriber करे।

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